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मुज़फ्फरनगर से अब ‘भगवान’ भी हो रहे है पलायन को मजबूर, 25 मई को 500 साल पुराना मंदिर छोड़कर जायेंगे चंद्र प्रभु !

मुजफ्फरनगर। कैराना के पलायन को चुनावी मुद्दा बनाकर देश और प्रदेश की सत्ता में आयी बीजेपी के राज में भी मुज़फ्फरनगर में पलायन हो रहा है ,बुढ़ाना इलाके के एक गांव से जैन धर्म के लोग पलायन कर रहे है। स्थिति यहाँ तक बन गयी है कि वहां से सदियों पुराने मंदिर को भी खाली करके भगवान की मूर्ति भी स्थानांतरित की जा रही है।

परिवारों के पलायन को लेकर तो आपने तमाम खबरें देखी होंगी, लेकिन शायद ही कभी आपने भगवान का पलायन देखा है। मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना से एक ऐसा ही अजीब-ओ-गरीब मामला सामने आया है। यहां 500 साल पुराने जैन मंदिर से भगवान चंद्रप्रभु का पलायन कराया जा रहा है

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पूरा मामला जनपद मुज़फ्फरनगर के बुढ़ाना थाना क्षेत्र के गाँव हुसैनपुर कला गाँव का है। जोकि 90 के दशक में जैन समाज का बाहुल्य गाँव हुआ करता था। जैन समाज के लोगों के पास गाँव का जमींदारा हुआ करता था। लेकिन गाँव में जैन समाज के लोगों के घर एक के बाद एक डकैती के दौरान हत्या होने की घटना ने गाँव को हिला कर रख दिया था। जिसके बाद कुछ परिवार डकैती की घटनाओं के कारण ,तो कुछ रोज़गार व शिक्षा के लिए गाँव से पलायन कर गए थे।

अब समय ये आया कि गाँव में जैन समाज का एक भी व्यक्ति नही बचा है। अगर कुछ बचा है तो वो बचा है ,500 साल पुराना जैन समाज का मंदिर। जैन समाज के लोग अब मंदिर में स्थापित भगवान चंद्रप्रभु की मूर्तियों को भी पलायन कराकर बुढ़ाना क़स्बे के जैन मंदिर में स्थापित करने की पूरी तैयारी कर चुके है। मूर्तियों को दूसरी जगह स्थापित करने के पीछे का कारण मंदिर का जर्जर होना व मंदिर की देखरेख करने वालो का ना होना बताया गया है। हालाँकि गाँव वाले अन्य समाज के लोग मंदिर से मूर्तियां जाने से दुख प्रकट कर रहे है। 25 मई को बैंड बाजे के साथ गाँव से मूर्तियों को लेकर बुढ़ाना क़स्बे के जैन मंदिर में स्थापित किया जाएगा और भगवान की पूजा अर्चना की जाएगी।

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जैन मंदिर की देखरेख करने वाले राजपाल जैन ने बताया कि ये तो बहुत पुराना गाँव है। यहाँ पर तो पता नहीं कितनी पीढ़ियों से रहते आ रहे हैं। अब यहाँ पर कोई नहीं रहा है इसके पीछे कारण रोज़गार व पहले डकैतों का डर था।  यहाँ पर डकैती पड़ी थी जिसमें बाप बेटे दोनों मार दिये गए थे। वहाँ से जब से लोग चले गये, उससे पहले भी एक डकैती पड़ी थी उसमे भी एक लड़के को मार दिया था, उसके बाद वे भी चले गए यहाँ से ।कुछ डकैतों की वजह से चले गए तो कुछ रोज़गार की वजह से और कुछ इस डर की वजह से चले गए।

उन्होंने बताया कि सच्चाई यही है कि मंदिर जर्जर हो रहा है, पता नहीं कितना पुराना मंदिर है ये, दरारें पड़ी हुई है, कब गिर जाए पता नहीं । यहां पर कोई इंतज़ाम नहीं होता, हमारे यहाँ ये विधान है कि मंदिर में पूजा रोज़ होनी चाहिए, नही होगी तो समाज में बोझ है।  अब इस वजह से मंदिर में पुजारी भी रखा लेकिन वो गुटखा खाता था और शराब पीता था, उन्हें भगा दिया। अब तो मजबूरी है, यहाँ कोई पूजा करने नहीं आता, जब कोई नहीं आता तो हमने सलाह करके इन्हें भी बुढ़ाना ही शिफ्ट करने की बात रखी। इस स्थिति को देखते हुए अब  25 मई को गांव हुसैनपुर से मूर्तियों को बैंडबाजों के साथ बुढ़ाना लाकर स्थापित किया जाएगा।

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गांव हुसैनपुर कलां के बुजुर्ग बताते हैं कि मंदिर के चारों तरफ दूसरी आबादी बढ़ने से मंदिर के रखरखाव व पूजा अर्चना करने में दिक्कत हो रही थी। हुसैनपुर कलां गांव का इतिहास पुराना है। बदली स्थिति में गांव में लगभग दस साल से जैन साहूकारी व व्यवसायिक गतिविधियों के केन्द्र में होने के बाबजूद यहाँ कोई जैन परिवार नहीं है। एक पुजारी पूजा व मंदिर की देखरेख करते थे। पांच सौ साल पहले यहाँ बनाये मंदिर की व्यवस्था में अब कमी आई और मंदिर की हालत बिगड़ गई। ऐसे में भगवान चंद्रप्रभु जिनालय समोशरण मूर्तियों को बुढ़ाना स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर लाया जा रहा है।

गांव के पुराने बुजुर्ग कहते है कि पहले यहाँ मिश्रित आबादी थी और सभी बड़े सद्भाव से रहते थे। जैन धर्म के प्रमुख साधु व विद्वान यहां विहार करने मंदिर में आते थे।  बुजुर्ग बताते हैं, हुसैनपुर कलां गांव में पिछले पांच दशक में बदलाव आया। मिश्रित आबादी एक समुदाय विशेष में बदलती चली गई है। कभी जैन साधुओं का केंद्र रहे हुसैनपुर कलां में अब सन्नाटा है। मूर्तियों की स्थापना के बाद मंदिर का क्या होगा ? इस सवाल के जवाब पर फिलहाल हर कोई चुप है।

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यूपी चुनाव में ‘यूपी में बाबा’ गाकर सुर्खियों में आई प्रसिद्ध कवियत्री अंबिका जैन अंबर ने इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया है। अंबिका के इस मुद्दे को उठाने पर उन्हें ट्रोल भी किया जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं जब यूपी में बाबा तो फिर यह पलायन क्यों है ?

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