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भाजपा के न.पा. चेयरमैन के पति को पकड़ना तितावी पुलिस को पड़ा महंगा, पूरी टीम तत्काल निलंबित

मुजफ्फरनगर। बिना वरिष्ठ अफसरों से स्वीकृति लिए पड़ौसी राज्य में जाकर छापा मारना और बीजेपी नेता के बेटे और नगर पालिका चेयरमैन के पति को पकड़ने का प्रयास करना मुज़फ्फरनगर के थाना प्रभारी को भारी पड़ गया, इस मामले में थाना अध्यक्ष समेत छापे में शामिल रही पूरी टीम को एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

दरअसल हरियाणा में बहादुरगढ़ के बीजेपी नेता कर्मबीर राठी के बेटे कमल और भतीजे रमेश राठी के खिलाफ मुजफ्फरनगर में अपर जिला जज 12 की कोर्ट ने गिरफ्तारी का वारंट जारी कर रखा था। इन्हीं आदेशों का अनुपालन करते हुए मुजफ्फरनगर पुलिस  कमल को गिरफ्तार करने बहादुरगढ़ पहुँच गई और वहां बीजेपी नेता के बेटे कमल को गिरफ्तार भी कर लिया जबकि उनका भतीजा रमेश पुलिस के हाथ नहीं आया। रमेश की पत्नी सरोज राठी बहादुरगढ़ नगर परिषद की चेयरपर्सन भी है।

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बेटे की गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर भाजपा नेता कर्मबीर राठी और उनके समर्थक भड़क गए और थाने पहुंचकर यूपी पुलिस पर जबरदस्ती घर में घुसने, मारपीट करने और वारंट नहीं दिखाने के आरोप लगाए और हंगामा कर दिया। नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी ने तो इनेलो प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक नफे सिंह राठी और उनके भांजे सोनू दलाल पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।

उनका आरोप था कि नफे सिंह राठी और उनके भांजे ने ही उनके पति रमेश और देवर कमल पर झूठा मुकदमा दर्ज करवाया था,  इतना ही नहीं उन्होंने यूपी पुलिस को भी आरोपों के कटघरे में खड़ा किया था। उनका कहना था कि मुज़फ्फरनगर पुलिस जबरदस्ती उनके घर में घुसी और पुलिस ने वारंट भी नहीं दिखाया,इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश पुलिस पर भाजपा नेता ने अपने बेटे कमल से मारपीट करने का भी आरोप लगाया था ।

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जबकि मुज़फ्फरनगर पुलिस ने कहा था कि आरोपी ने भागने का प्रयास किया था और मुश्किल से उसे गिरफ्तार किया  गया , उसे गिरफ्तार कर पुलिस मुजफ्फरनगर लेकर जाएगी और कोर्ट में पेश करेगी।  उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना था कि  मारपीट तो उनके साथ हुई है, जबकि उन्होंने आरोपी के साथ किसी तरह की मारपीट नहीं की।  मुज़फ्फरनगर  पुलिस ने कहा कि स्थानीय पुलिस को मामले की सूचना दी थी लेकिन आरोपी उन्हें रास्ते में मिल गया, जब उसे साथ चलने के लिए कहा गया तो उनके साथ बदतमीजी की गई।  गिरफ्तार कमल और चेयरपर्सन सरोज के पति रमेश  पर आईपीसी की धारा 307, 504 और 34 के तहत मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

थाना प्रभारी अशोक दहिया ने बताया था कि यूपी पुलिस ने थाने में सूचना दी थी। कोर्ट के आदेश पर गिरफ्तारी हुई है। मारपीट के मामले में कोई शिकायत आएगी तो कानूनी कार्यवाही की जायेगी।

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इस मामले में बीजेपी नेताओं ने जब मुज़फ्फरनगर एसएसपी संजीव सुमन से शिकायत की तो एसएसपी ने क्षेत्राधिकारी फुगाना से पूरे मामले की जांच कराई जिसमे पाया कि थानाध्यक्ष तितावी कर्मवीर सिंह द्वारा उप निरीक्षक मुकेश त्यागी, हेड कांस्टेबल अनिज सिन्धु, राहुल कुमार को बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के नियम विरुद्ध तरीके से वादी द्वारा उपलब्ध करायी गयी प्राईवेट गाड़ी से वादी के पैरोकारों को साथ लेकर हरियाणा प्रान्त के जिला झज्जर के थाना बहादुरगढ क्षेत्र भेजा गया, जहाँ पर इन कर्मियों ने वादी के पैरोकारों के साथ मिलकर एनबीडब्लू तामील में अतिरिक्त तत्परता दर्शाते हुए वारण्टी कमल राठी को बिना समुचित प्रक्रिया का पालन किये गिरफ्तार किया।

स्थानीय लोगों द्वारा उक्त व्यक्ति के अपहरण की सूचना थाना बहादुरगढ पर दी गयी एवं उक्त घटना के दृष्टिगत वहाँ पर वाद-विवाद की गम्भीर स्थिति उत्पन्न हो गयी। जिसमें उक्त कर्मियों की लापरवाही और स्वेच्छाचारिता प्रदर्शित हुई एवं इससे पुलिस की छवि धूमिल हुई है। एसएसपी ने इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर उक्त कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया।

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